Thursday, December 23, 2010

पिता....का मूल्य

पिता....का मूल्य


पिता जीवन है, संबल है, शक्ति है.

पिता स्रष्टि के निर्माता कि अभिव्यक्ति है.

पिता अंगुली पकडे बच्चे का सराहा है.

पिता कभी कुछ मीठा है तो कभी कुछ खारा है.

पिता परिवार का अनुशासन है, रोटी,कपडा और मकान है.

चहेते से परिंदे का बड़ा आसमान है.

पिता अप्रदर्शित,अनंत प्यार है.

पिता है तो बच्चों को इंतजार है.

पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं.

पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं.

पिता से परिवार में राग प्रतिपल राग है.

पिता से ही मां कि बूंदी और सुहाग है.

पिता परमात्मा कि जगत के प्रति आसक्ति है.

पिता गृहस्थाश्रम में उच्च स्थिति कि भक्ति है.

पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार कि पूर्ति है.

पिता रक्त में दिए हुए संस्कारों कि मूर्ति है.

पिता एक जीवन को जीवन दान है.

पिता दुनिया दिखाने का अहसास है.

पिता सुरक्षा है, अगर सिर पर हात है.

पिता नहीं तो बचपन अनाथ है.

तो पिता से बड़ा तुम अपना नाम करो.

पिता का अपमान नहीं,अभिमान करो.

क्योंकि माँ बाप कि कमी कोई पात नहीं सकता.

ईश्वर भी इनके आशीषों को काट नहीं सकता.

दुनिया में किसी भी देवता का स्थान दूजा है.

माँ बाप की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है.

विश्व में किसी भी तीर्थ की यात्रा सब व्यर्थ है.

यदि बेटे के होते हुए माँ बाप असमर्थ है.

वो खुशनसीब होते हैं,माँ बाप जिनके साथ होते है.

क्योंकि माँ बाप के आशीषों के हजारों हाथ होते हैं.



रमाकांत चौधरी-आर्थिक पत्रकार-व्यापार-मुंबई.

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