परम्परा....
ओस की एक बूंद सी होती है बेटियां
स्पर्श खुरदरा हो तो रोटी है बेटियां
रोशन करेगा बेटा तो एक ही कुल को
दो दो कुलों की शान बढाती है बेटियां
कोई नहीं दोस्तों एक दुसरें से कम
हीरा अगर है बेटा तो मोती है बेटियां
काँटों की राह पे ये खुद चलती रहेंगी
औरों के लिए फूल ही बोटी है बेटियां
विधि का विधान है यही दुनिया की रस्म है
अपने पिर्यों को छोड़ पिया के घर जाती है बेटियां
धन्यवाद
रमा कान्त चौधरी-आर्थिक पत्रकार (व्यापार) मुंबई
Friday, December 17, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment